सहकारिता से साकार होगा आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश व लोकल के लिए वोकल का सपना
भारतीय संस्कृति का मूल भाव है 'सर्वे भवन्तु सुखिन:'' तथा 'वसुधैव कुटुम्बकम्'' और यही भाव सहकारिता का भी है। सहकारिता भारत की मौलिक सोच है, यह कहीं से आयातित विचार नहीं है। यही कारण है कि भारत के जन-मानस में, खासतौर पर किसानों, पशुपालकों, स्व-सहायता समूहों आदि को सहकारिता मॉड…